शपथ लो अब कोई हेमंत करकरे

नेस्तनाबूद कर दो
उस शरीर को जो धर्म के नाम पर आतंक मचाये
रेत के किलों से डहा दो
उन महलों को जहां से
उगतीं हैं धर्मांध पौध...........!
कोई पाप न होगा अगर तुम एक बार बचा लोगे
एक करकरे को
तुम जो नि:शब्द खड़े
धर्म के मामलों पर कुतर्क
सुन लेते हो
तुम जो खिड़कियाँ बंद कर व्यवस्था को गरियाते हो
तुम जो सुबह दफ्तर जाते हो
तुम जो सड़क पर गिरे घायल को
अनदेखा कर निकलते हो...
छोड़ दो ये चमड़ी बचाने की आदत
उठो हुंकारों शंखनाद करो नि:शब्द में शब्द भरो
फहरा दो विश्व में शान्ति का परचम
बहकाने न दो बच्चों के कदम
सिखाओ मानव धर्म
बेशक कठोर हो जाओ जब देश की प्रतिष्ठा को कोई आंच आए
विश्व का अंत करने वाली सोच का सर कुचल दो
शान्ति द्रोहियों को ठीक वैसे ही मारो जैसे
एक बन्दर सांप का सर पकड़ कर तब तक रगड़ रगड़ के मारता है जब तक उसका अंत न हो जाए
कोई अपराध नहीं है साथ दो हौसला दो वीरों को
शपथ लो
अब कोई हेमंत करकरे अकारण न शहीद होगा
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हेमंत करकरे (जन्म १९५४-२६ नवंबर २००८) मुंबई के आतंक विरोधी दस्ते के प्रमुख थे। वे २६ नवंबर २००८ को मुंबई में हुए श्रेणीबद्ध धमाकों और गोलीबारी का बहादुरी से सामना करते हुए शहीद हुए। हेमंत करकरे १९८२ बैच के आईपीएस अधिकारी थे। नागपुर के विश्वेश्वर रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री लेने वाले करकरे ने डॉ. केपी रघुवंशी से मुंबई एटीएस के प्रमुख का पदभार ग्रहण किया था।
करकरे ने चंद्रपुर के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में भी काम किया था। नॉरकोटिक्स विभाग में तैनाती के दौरान उन्होंने पहली बार विदेशी ड्रग्स माफिया को गिरगांव चौपाटी के पास मार गिराने का कारनामा कर दिखाया था।[१] वे रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के लिए ऑस्ट्रिया में सात साल तक अपनी सेवाएँ देने के बाद इसी साल महाराष्ट्र कैडर में वापस लौटे थे। इसके तत्काल बाद ही जनवरी में उन्हें एटीएस प्रमुख बनाया गया था। वे इन दिनों २९ सितंबर ०८ को मालेगांव में हुए बम विस्फोट की गुत्थी सुलझाने में जुटे हुए थे। मुंबई पुलिस ने हेमंत करकरे के रूप में एक जांबाज और दिलेर अधिकारी खो दिया है। स्वभाव से बेहद शांत और संयमी करकरे पुलिस महकमे में अपनी ईमानदारी और निष्ठा के लिए जाने जाते थे।

विकी पीडिया से साभार मूल स्रोत : दैनिक भास्कर

एक पेड़ काटने पर सौ गायों का दंड

कुछ समय पूर्व एक सज्‍जन किसी कार्य से चण्डीगढ़ की एक घटना बता रहे थे। उन्‍होने बताया कि रस्ते में सड़क के दोनों ओर हरियाणा सरकार द्वारा प्रगति के नाम पर हजारो वृक्षों को काट काट कर सड़कों को चौड़ा करने का अभियान चल रहा था जो वृक्ष सड़क के दोनों ओर छाया देने तथा प्रदूषण रोकने के लिए लगाये गए थे वहीँ पर पर्यावरण संरक्षण मूल्यों को ताक में रख कर सड़कों को प्रदूषण युक्त किया जा रहा है।

उन्‍होने बताया कि कुछ समय पूर्व इसी सन्दर्भ में एक लघु लिख जो केशव संवाद साप्ताहिक पत्रिका में छपा था, जिसमें देश सूडान में एक पेड़ काटने पर सौ गाय दंड स्वरप देनी पड़ती हैं तथा वहां गाय एवं पेड़ों को सरकार द्वारा पूरा सरंक्षण दिया जाता है। आप इस लघु लेख को यहाँ पढ़ सकते है।

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“ नारी ” तू हैं बड़ी महान

भारत में धर्म एक ऐसा पहलू है जिस पर अक्षेप करना बहुत ठीक नही समझा जाता है, धर्म के नाम पर गलत बयान बाजी करना निहायात ही स‍ंक्रीर्ण विचारधारा की ओर इंगित करता है। मेरे पिछले दो लेख अल्‍लाह की शक्ति का अतिक्रमण करता भारतीय संविधान, कठमुल्‍लों फतवा जारी करो और इस्‍लाम का संदेश आतंक मचाओ हूर मिलेगी मे मैने पाया कि मैने तथ्‍य परक बातें ही रखी थी, जो सही थी किन्‍तु मुस्लिम सम्‍प्रदाय के लोगो का कहना था नही ऐसा नही है, हम बिल्‍कुल पाक-साफ है, दोष तो तुम्‍हारे अंदर ही है।

hindu Women in India 
एक सज्‍जन एक बड़ी सी आधी-अधूरी श्‍लोको की पोटली ले आये और बताने लगे कि हिन्‍दू धर्म मे भी आतंक की परिभाषा निम्‍न प्रकार से दी गई है किन्‍तु वह मित्र उन श्‍लोको का ठीक ढ़ग से अध्‍ययन करना भूल गये कि उसने आतंक के नाश की परिभाषा है न कि आतंक की जैसा कि इस्‍लाम मे कि आतंक मचाओ हूर मिलेगी। हिन्‍दू धर्म तो सर्व धर्म सम्‍भाव की बात करता है हमारे यहाँ पर्नजन्‍म की व्‍यवस्‍था है जिससे व्‍यक्तियों मे यह भय रहता है कि अमुख पाप करने से हमें अगले जन्‍म में निम्‍न योनि जन्‍म मिलेगी तथा अच्‍छे कृत्‍य से वैकुंठ की प्राप्ति होगी। इस प्रकार की मान्‍याताओ के कारण लोग गलत काम को करने से डरते है किन्‍तु मुस्लिम धर्म में तो इस प्रकार व्‍याख्‍या की गई अमुख काम दो नही तो अल्‍लाह नाराज हो जायेगा। स्त्रियों के विषय में ऐसी ऐसी बातें लिखी गई है जो उन्‍हे निम्‍न स्‍तर की प्राणी के रूप में ले जाता है। जबकि हिन्‍दू धर्म में नारी को सर्वोच्‍च स्‍थान दिया गया है।

यत्र नार्यस्‍तु पूज्‍यन्‍ते रमन्‍ते तत्र देवता:।
यत्रैतास्‍तु न पूज्‍यन्‍ते सर्वास्‍तत्राsफला क्रिया:।। मनु‍स्‍मृति 3-56
अर्थात - जहाँ नारी का आदर होता है, वहाँ देवता रहते है जहाँ उनका आदर नही होता है, वहाँ सारे काम निष्‍फल होते है।

शोचयन्ति जामयो यत्र विनश्‍यत्‍याशु तम्‍कुलम्।
न शोययन्ति तु यत्रैता वर्द्धते तद्धि सर्वदा।। मनु‍स्‍मृति 3-57

अर्थात - जिस कुल में नारियों को कष्‍ट होता है, वह कुल शीघ्र ही नष्‍ट हो जाता है। जहाँ नारियाँ सुखी रहती है, वह कुल सदैव फलता फूलता है।

जामयो यानि गेहानि शन्‍त्‍य प्रति पूजिता:।
तानि कृत्‍याहतानीव विनश्‍यन्ति समन्‍तत:।। मनु‍स्‍मृति 3-58

अर्थात- उचित सुख और मान न पाकर जिस कुल को नारियाँ शाम देती है, वह कुल नष्‍ट हो जाता है।

मनुस्‍म‍ृति की उपरोक्‍त श्‍लोक न सिर्फ हिन्‍दू धर्म में स्त्रियों की स्थिति को दर्शाते है बल्कि पुरूषो को भी इस प्रकार के कृत्‍य करने का निर्देश देते है कि नारियों के अपमान से देवता भी दूर हो जाते है। हिन्‍दू समाज में नारियों की पूजा सदैव रही है, मुगलो के अगमन के समय में मुगलो के अत्‍याचार के परिणाम स्‍वरूप हिन्‍दू धर्म में स्त्रियों के सम्‍बन्‍ध में कुरीतियो को समाना करना पड़ा, इसका कारण भी था, रानी पद्मावती स्त्रियॉं जो अपनी लाज की रक्षा करने के लिये जौहर कर सही और कुछ इस्‍लामिक कट्टरवाद की शिकार हुई इसका प्रभाव आज भी मुसिलम समाज में स्त्रियों की दशा देखने पर मिल जायेगा। 

मेरी पंसद

वाह..नारी तेरी अजब हैं कहानी...
दूसरों को खुशी देकर तू खुश हो जाती...
कभी न खोई ममता तूने, कभी न देखा तूने स्वार्थ...
ममता की एक महान मूरत हैं तू...
इस दुनिया की एक सूरत है तू...
दुनिया तुझको शीश नमाती...
हर धर्म की पहचान हैं तू...
और हर घर की जान हैं तू...
"माँ" के इस उँचे पद पर आसीन है तू...
नारी बड़ी महान हैं तू...
नारी बड़ी महान हैं तू।

सनातन धर्म ही शेष रहेगा

ऋषियों का धर्म, सनातन धर्म - अनन्त काल से है और रहेगा। इस सनातन धर्म के भीतर निराकार,साकार सभी प्रकार की पुजाएँ है। ज्ञानपथ,भक्तिपथ सभी है अन्य जो समप्रदाय है, वे आधुनिक है l कुछ दिन रहेंगे, फिर मिट जायेंगे। ----------श्री रामकृष्ण परमहंस

महाशक्ति के 10 साल

कल महाशक्ति अपने स्‍थापना के 11वें वर्ष में प्रवेश कर गई, किन्‍तु मै इस तैयार पोस्‍ट को कल पोस्‍ट नही कर पाया, आज कर रहा हूँ। महाशक्ति 1999 में मेरे, मित्र अभिषेक शर्मा और आशीष सिंह के द्वारा महाशक्ति बनाई गयी, क्‍यो बनाई गई इसकी लम्‍बी कहानी है बहुत तह मे नही जाना चाहूँगा। हम 10 वर्ष पूरे कर 11 वें वर्ष में प्रवेश कर रहे है, अच्‍छा लग रहा है हम साथ-साथ है।

पहली बार 2003 में हमने अपनी कार्यकारणी गठित की थी। तब हम अध्‍यक्ष बने थे, अभिषेक वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष, राजकुमार उपाध्‍यक्ष और जयप्रकाश को महासचिव बनाया गया था।

महाशक्ति को लेकर र्निउद्देश 2006 को चिट्ठकारी की दुनिया में प्रवेश किया, 2007 में महाशक्ति समूह भी बनाया। इन 10 सालो में महाशक्ति के साथ मध्‍यमिक स्‍तर के छात्र से कब पोस्‍ट ग्रेजुएट हो गया पता ही नही चला। हम महाशक्ति के सदस्‍य जब भी मिलते है तो 1999 के दिन याद आ जाते है, और वो बचपना भी।

आज के दिन महाशक्ति से जुड़े अपने सभी सभी मित्रो को याद करना चाहूँगा।
सर्व प्रथम कक्षा 9-10 के मित्र अभिषेक शर्मा, आशीष सिं‍ह, नवनीत तिवारी, दौलत राम, विक्रेन्‍द्र, राजकुमार, जय प्रकाश, संजू जोशी, विनीत सिंह‍, विवेक मिश्र, बृजेश साहू।
कक्षा 11-12 में- ताराचंन्‍द्र गुप्‍त, सुबोध कुशवाहा,
स्‍नातक में- जीतेश सिंह, वीरेन्‍द्र नाथ, शिव कुमार गुप्‍ता, लव कुमार गुप्‍ता
परास्‍नातक में - पवन यादव
लॉ - देवेश श्रीवास्‍तव, फूलचन्‍द्र पाण्‍डेय, अखिलेख श्रीवास्‍तव, इन्‍द्रेश।
कुछ ऐसे लोग जो अपने आप जुडे- कामता प्रसाद पाल, विशाल मिश्र, अनुपम सिंह

ब्‍लाग की दुनिया में तो आप सभी का प्‍यार तो मुझे मिल ही रहा है, अब नाम लेने लगूँगा तो बहुत लम्‍बा हो जायेगा और कुछ न कुछ नाम छूट ही जायेगे।

आज अपनी बात खत्‍म करता हूँ, सभी मित्रो तथा सदस्‍यो को बहुत बहुत, महाशक्ति के स्‍थापना दिवस की बहुत बधाई।

अब तो इंतजार बंद करो

आपका इंतजार करते,
घंटे बीत गये,
ये घंटे ऐसे लगते जैसे सदिया बीत गई।

आपका इंतजार करते,
ऑखे थक गई,
ये आखे ऐसी लगती जैसे रात भर सोई नही ।

आपका इंतजार करते,
दिल भी हार गया
दिल भी कहता है अब तो इंतजार बंद करो।

_______________शापित यक्ष ______________




       दीवाली के पहले गरीबी से परेशान  हमारे गांव में लंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम और नौखे ने विचार किया इस बार लक्ष्मी माता को किसी न किसी तरह राजी कर लेंगें . सो बस सारे के सारे लोग माँ को मनाने हठ जोगियों की तरह  रामपुर की भटरिया पे हो लिए जहां अक्सर वे जुआ-पत्ती खेलते रहते थे पास के कस्बे की चौकी पुलिस वाले आकर उनको पकड़ के दिवाली का नेग करते ये अलग बात है की इनके अलावा भी कई लोग संगठित रूप से जुआ-पत्ती की फड लगाते हैं..... अब आगे इस बात को जारी रखने से कोई लाभ नहीं आपको तो गांव में लंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम और नौखे की  कहानी सुनाना ज़्यादा ज़रूरी है.
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                      तो गांव में लंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम - नौखे की बात की वज़नदारी को मान कर  "रामपुर की भटरिया" के  बीचौं बीच जहां प्रकृति ने ऐसी कटोरी नुमा आकृति बनाई है बाहरी अनजान  समझ नहीं पाता कि "वहां छुपा जा सकता है. जी हां उसी स्थान पर ये लोग पूजा-पाठ की गरज से अपेक्षित एकांतवासे में चले गए ..हवन सामग्री उठाई तो लंगड़ के हाथौं  से गलती से घी ज़मींन में गिर गया . बमुश्किल जुटाए संसाधन का बेकार गिरना सभी के क्रोध का कारण बन गयाकल्लू ने तो लंगड़ को एक हाथ रसीद भी कर दिया ज़मीं के नीचे घी रिसता हुआ उस जगह पहुंचा जहां एक शापित-यक्ष बंधा हुआ था .उसे शाप मिला था की  सबसे गरीब व्यक्ति के हाथ  से गिरे  घी की बूंदें तुम पर गिरेंगीं तब तुम मुक्त होगे सो मित्रों यक्ष मुक्त हुआ मुक्ति दाता लंगड़ का आभार मानने उन तक पहुंचा . यक्ष को देखते ही सारे घबरा गए कल्लू की तो घिग्घी बंध गई. किन्तु जब यक्ष की दिव्य वाणी गूंजी "मित्रो,डरो मत, तो सब की जान में जान आई.
यक्ष:तुम सभी मुझे शाप मुक्त किया बोलो क्या चाहते हो...?
मुन्ना: हमें लक्ष्मी की कृपा चाहिए उसी की साधना में थे हम .
यक्ष: ठीक है तुम सभी चलो मेरे साथ 
  सभी मित्र यक्ष के अनुगामी हुए पीछे पीछे चल दिए पीपल के नीचे बैठ कर यक्ष ने कहा :-"मित्रो,मैं पृथ्वी भ्रमण पर निकला था तब मैनें अपनी शक्ति से तुम्हारे गांव के ज़मींदार सेठ गरीबदास की माता से गंधर्व विवाह किया था उसी से मेरा पुत्र जन्मा है जो आगे चल के सेठ गरीबदास के नाम से जाना जाता है."
                    यक्ष की कथा को बडे ही ध्यान से सुन रहे चारों मित्रों के मुंह से निकला :-"तो आप ही हमारे बडे ज़मींदार हैं ?"
 "हां, मैं ही हूं, घर-गिरस्ति में फ़ंस कर मुझे वापस जाने का होश ही न रहा सो मुझे मेरे स्वामी ने पन्द्र्ह अगस्त उन्नीस सौ सैतालीस  रात जब भारत आज़ाद हुआ था शाप देकर "रामपुर की भटरिया में कैद कर दिया था और कहा था जब गांव का सबसे गरीब आदमी घी तेल बहाएगा और उसके छींटै तुम पर गिरेंगे तब तुम को मुक्ति-मिलेगी
 आज़ तुम सबने मुझे मुक्त किया चलो.... बताओ क्या चाहते हो ?
 सभी मित्रों ने काना-फ़ूसी कर "रोटी-कपडा-मकान" मांग लिए मुक्ति दाताओं के लिये यह करना यक्ष के लिए सहज था. सो  उसने माया का प्रयोग कर  गाँव के ज़मींदार के घर की लाकर  तिजोरी बुला   कर ही उन गरीबों में बाँट दी  . जाओ सुनार को ये बेच कर रूपए बना लो बराबरी से हिस्सा बांटा कर लेना और हां तुम चारों के लिए मैं हर एक के जीवन में एक बार मदद के लिए आ सकता हूं.
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                        उधर गांव में कुहराम मचा था. सेठ गरीब दास गरीब हो गया. पुलिस वाले एक एक से पूछताछ कर रहे थे. इनकी बारी आये सभी मित्र बोले "हम तो मजूरी से लौटे हैं." किन्तु कोई नहीं माने झुल्ला-तपासी में मिले धन को  देख कर सबको जेल भेजने की तैयारी की जाने . कि लंगड़ ने झट यक्ष को याद कर लिया . यक्ष एक कार में गुबार उडाता पहुंचा और पुलिस से रौबीली आवाज़ में बोला "इनको ये रूपए मैंने इनाम के बतौर दिए हैं."ये चोर नहीं हैं.
रहा सवाल सेठ गरीब दास का सो ये तो वास्तव में गरीब हैं
हवालदार ने कहा :-सिद्ध करोगे
यक्ष: अभी लो  गाँव के सचिव से  गरीबी रेखा की सूची मंगाई गई जिसमें सब से उपर सूची अनुसार सबसे ऊपर सेठ गरीब दास का नाम था
  सूची में जो नाम नहीं थे वो लंगड़,दीनू,मुन्ना,कल्लू,बिसराम और नौखे के...?

                                                    गिरीश बिल्लोरे"मुकुल"
                                                   जबलपुर मध्य-प्रदेश
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का साम्प्रदायिक चेहरा

विदेशी पैसा से पलने वाले मिडीया और तथाकथित मुर्ख बुद्धिजीवी के द्वारा राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के द्वारा किये गये कार्य को अनदेखा करके राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के मुस्मिल सम्प्रदाय के विरोधी के रुप में दिखाया जा रहा था। विदेशी पैसा से पलने वाले मिडीया और मुर्ख बुद्धिजीवी की झुठ की कलई इस चित्र को देख कर खुल गया कि किस तरह से विश्व के सबसे बडे़ स्वयमसेवी संस्था समाज निर्माण के कार्य में लगा है ना कि किसी भी तरह के समाज को तोड़ने के कार्य में। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के स्वंमसेवकों द्वारा किया गया समाजिक कार्य किसी द्वेषभावना के द्वारा नही किया जाता है इसका जीता जागता सबूत इस चित्र में मुस्लमानों के बीच में खाने-पीने के सामग्री को वितरीत करते हुये देख कर लगाया जा सकता हैं। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ को कोसने वालों का आज घिनैना चेहरा दिख गया है और वैसे आदमी जो राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ को सम्प्रदायिक या मुस्लिम विरोधी करार देते पर तुले थे इस चित्र को देख हार्ट ऎटैक के मारे गीर कर तड़प रहें होगे या फिर कसम खा लिये होंगे की बीना जाने समझे राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ का बुराई अपने जीवन में कभी नही करेंगे और अपने कुटील मानसिकता के द्वारा देश को बर्बाद करने का काम छोड़ कर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के साथ मिल कर देश को परम वैभव में पहुचाने का कार्य करेंगे।















चींटी और टिड्डा

'चींटी और टिड्डा ' कहानी तो सबने सुनी होगी? भारत में भी हुआ था एक बार यही, जब चींटी ने पूरी गर्मी में मेहनत करके अपने लिए घर बनाया और टिड्डा?वो तो ठहरा मस्त मौला , तो इस कहानी में कैसे सुधर जाता? जाड़ों के दिनों में चींटी मज़े से अपने 3 bed apartment में २४*7 फ़ूड , एनर्जी और वाटर सप्लाई के मज़े लेने लगी...


...यहाँ तक तो सब ठीक लेकिन ये भारीतय टिड्डा था....
चुप क्यूँ रहता?


टिड्डे ने एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की, और अपनी व्यथा सबको सुनाई , और जानना चाहा देश की जनता से कि मैं कैसे ऐसे रह सकता हूँ जबकि देश में एक 'चींटी वर्ग' भी है?

NDTV, बीबीसी, INDIA TV, The Times Of India आदि सभी मुख्या न्यूज़ चैनल और अख़बारों ने इस घटना को भूखों मरते टिड्डे कि फोटू और उसके बगल मैं चींटी की वाटर पार्क में खिचवाई फोटू के साथ दिखाया.

आखिर एक बेबस टिड्डा ऐसे कैसे मर सकता है ? फिर क्या था?

अरुंधती रॉय ने चींटी के घर के सामने धरना दिया....

मेधा पाटेकर टिड्डे के साथ आमरण अनशन में बैठ गयी...

मायावती ने इसे अल्पसंखकों के खिलाफ षडयंत्र कहा....

कोफ्फी अन्नान ने भारतीय सरकार को 'टिड्डे की मूलभूत सुविधाओं' का ख्याल न रखने हेतु आड़े हाथों लिया.




टिड्डे के ब्लॉग 'चींटी के पार' में कमेन्ट और follower १००० के पार पहुँच गए थे.

'स्वर्ग और चिरस्थायी शांति के लिए अग्रेषित करें , और न करने पर परमेश्वर के प्रकोप के लिए तैयार रहे ' type चैन मेल की बाढ़ ही आ गयी जिसमें माइक्रोसॉफ्ट वाले कथित तौर पर टिड्डे को हर forwarded मेल में 1 पैसा देने वाले थे .

विपक्षी दल के नेताओं ने सदन का बहिष्कार किया और लोक सभा ,राज्य सभा की कार्यवाही नहीं चलने दी.

लेफ्ट फ्रंट ने बंगाल बंद का आह्वाहन किया.

केरला ने न्यायिक जांच करवाने का केंद्र सरकार से अनुरोध किया.

CPM ने तुंरत ही एक कानून पारित किया जिससे की चींटी को अत्यधिक क्ष्रम करने से रोका जा sake तथा चींटी और टिड्डे के बीच गरीबी का साम्यवाद आ जाए .

ममता बनर्जी ने टिड्डे के लिए भारतीय रेल की सभी गाड़ियों में मुफ्त एसी कोच की व्यवस्था करवा दी.
 named as the 'Grasshopper Rath'.

अंततोगत्वा , न्यायिक कमिटी ने ' Prevention of Terrorism Against Grasshoppers act[POTAGA] को मंजूरी दे दी जो जाडों से लागू माना जावे.

अर्जुन सिंह ने आनन फानन में टिड्डे के लिए सभी सरकारी विद्यालयों एवं इंस्टीत्युट में शिक्षा के क्षेत्र में 'Special Reservation ' दिए जाने की घोषणा कर दी .

चींटी को 'पोटागा' के अर्न्तगत दोषी पाया गया.चूंकि चींटी के पास देने के लिए कुछ नहीं बचा अतः उसका घर कुर्क कर दिया गया और एक शानदार समारोह में टिड्डे को दे दिया गया.ये शानदार समारोह सभी टीवी चंनल में लाइव दिखाया जा रह था.

अरुंधती रॉय ने इसे ' न्याय की जीत' की संज्ञा दी

लालू ने इसे 'सामाजिक न्याय ' कहा .

सीपीएम ने कहा की ये ' क्रांतिकारी दलित के पुनरुत्थान ' की कथा है.

कोफ्फी अननन ने टिड्डे को UN जनरल असेम्बली में आमंत्रित किया.

कई सालों बाद ...
.....
...........

...चींटी विदेश में बस गयी और उसने यू एस में एक multi-billion dollar company खोल ली ,

आरक्षण के बावजूद कही भारत में अब भी हजारों टिड्डे भूख से मर रहे हैं.

...कई चींटियों को खोने और कई टिड्डों को पालने के कारण भारत अब भी विकासशील देश है.

(Inspired From A Spam Mail)

महिला आर्मी की मजेदार फोटो

रुस महिला आर्मी


इजरायल महिला आर्मी

हिन्दुस्तान महिला आर्मी


अमेरीकन महिला आर्मी

ब्राजील महिला आर्मी

कोरिया महिला आर्मी

चीन महिला आर्मी

और अन्त में

 
 




पाकिस्तान महिला आर्मी